शायरी महफ़िल · by Kabir Khan · 2026-10-29
ग़ालिब का वो शेर जो हर उम्र में अलग मतलब देता है
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
कॉलेज में पढ़ा तो लगा इश्क़ की बात है। तीस के बाद पढ़ा तो लगा नौकरी, घर, EMI सब इसमें है। अब पिताजी को सुनाया तो चुप हो गए, फिर बोले 'ये तो मेरी पूरी ज़िंदगी है'।
आपके लिए कौन सा शेर उम्र के साथ बदल गया?
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
कॉलेज में पढ़ा तो लगा इश्क़ की बात है। तीस के बाद पढ़ा तो लगा नौकरी, घर, EMI सब इसमें है। अब पिताजी को सुनाया तो चुप हो गए, फिर बोले 'ये तो मेरी पूरी ज़िंदगी है'।
आपके लिए कौन सा शेर उम्र के साथ बदल गया?
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