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शायरी महफ़िल · by Ananya Rao · 2026-10-29

माँ पर दो लाइनें, दिवाली पर घर नहीं जा पा रहा

इस बार छुट्टी नहीं मिली। वीडियो कॉल पर माँ ने रंगोली दिखाई, फिर कैमरा थोड़ा नीचे करके आँखें पोंछ लीं, सोचा मैं नहीं देख रहा।

दीये तो इस बार भी उसने गिनकर ही जलाए होंगे
एक दीया बिन जले रखा होगा, मेरे हिस्से का

39 sparks · 3 comments

Comments

Gentle Marauder · 13 likes

'मेरे हिस्से का' पे आके रुक गई। परदेस में बैठे हर बच्चे की बात है

Kabir Khan · 1 likes

सच में, मैं भी इस बार घर नहीं जा रही

Kabir Khan · 5 likes

भाई ये पढ़ के माँ को फ़ोन कर लिया अभी। बहुत गहरा लिखा है