शायरी महफ़िल · by Ananya Rao · 2026-10-29
माँ पर दो लाइनें, दिवाली पर घर नहीं जा पा रहा
इस बार छुट्टी नहीं मिली। वीडियो कॉल पर माँ ने रंगोली दिखाई, फिर कैमरा थोड़ा नीचे करके आँखें पोंछ लीं, सोचा मैं नहीं देख रहा।
दीये तो इस बार भी उसने गिनकर ही जलाए होंगे
एक दीया बिन जले रखा होगा, मेरे हिस्से का
दीये तो इस बार भी उसने गिनकर ही जलाए होंगे
एक दीया बिन जले रखा होगा, मेरे हिस्से का
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