शायरी महफ़िल · by Priya Nair · 2026-10-29
नज़्म: सर्दी की पहली धूप
छत पर बिछी चटाई
नानी के हाथ का अचार
और धूप, जो बिना पूछे
गोद में आकर बैठ जाती थी
अब बालकनी है, धूप भी है
बस कोई कहता नहीं
थोड़ी देर बैठ जा बेटा
काम तो होते रहेंगे
कल पहली बार इस साल धूप में बैठा तो ये लिखा गया।
नानी के हाथ का अचार
और धूप, जो बिना पूछे
गोद में आकर बैठ जाती थी
अब बालकनी है, धूप भी है
बस कोई कहता नहीं
थोड़ी देर बैठ जा बेटा
काम तो होते रहेंगे
कल पहली बार इस साल धूप में बैठा तो ये लिखा गया।
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