शायरी महफ़िल · by Isha Menon · 2026-10-28
इंस्टाग्राम वाली 'शायरी' और असली शायरी में फ़र्क क्या है?
हर दूसरी रील पर उदास गाने के साथ दो लाइनें, जिनमें न वज़न है न तुक, बस 'वो चली गई' टाइप बातें। मैं किसी का मज़ाक नहीं उड़ा रहा, लोग लिख रहे हैं ये अच्छी बात है। पर क्या इससे शायरी हल्की हो रही है, या नए लोग इसी रास्ते से ग़ालिब तक पहुँचेंगे?
28 sparks · 4 comments