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शायरी महफ़िल · by Isha Menon · 2026-10-28

इंस्टाग्राम वाली 'शायरी' और असली शायरी में फ़र्क क्या है?

हर दूसरी रील पर उदास गाने के साथ दो लाइनें, जिनमें न वज़न है न तुक, बस 'वो चली गई' टाइप बातें। मैं किसी का मज़ाक नहीं उड़ा रहा, लोग लिख रहे हैं ये अच्छी बात है। पर क्या इससे शायरी हल्की हो रही है, या नए लोग इसी रास्ते से ग़ालिब तक पहुँचेंगे?

28 sparks · 4 comments

Comments

Gentle Marauder · 9 likes

फ़र्क बस मेहनत का है। बहर, रदीफ़, क़ाफ़िया सीखने में वक़्त लगता है, रील में वक़्त नहीं होता

Priya Nair · 9 likes

हर दौर में सस्ती और अच्छी दोनों तरह की शायरी रही है, बस अब सस्ती ज़्यादा दिखती है

Sleepy Coder · 8 likes

मैं ख़ुद रील्स से ही शायरी में आया था। फिर एक दिन जौन एलिया का वीडियो आया और ज़िंदगी बदल गई। रास्ता कोई भी हो

Curious Panda · 1 likes

जौन एलिया की वजह से आधी पीढ़ी शायर बन गई 😄