शायरी महफ़िल · by Isha Menon · 2026-10-29
गाँव की भाषा में लिखी कविता, भोजपुरी में
हिंदी में तो सब लिखते हैं, आज अपनी बोली में लिखने की कोशिश की:
बाबूजी के खेत में अबकी गेहूँ खूब फरल
बाकिर ओह खेत में बाबूजी के पसीना हमसे ना धरल
अर्थ: इस बार बाबूजी के खेत में गेहूँ खूब उगा, पर उस खेत में बाबूजी जितना पसीना बहाते थे, वो मुझसे नहीं हुआ।
बाबूजी के खेत में अबकी गेहूँ खूब फरल
बाकिर ओह खेत में बाबूजी के पसीना हमसे ना धरल
अर्थ: इस बार बाबूजी के खेत में गेहूँ खूब उगा, पर उस खेत में बाबूजी जितना पसीना बहाते थे, वो मुझसे नहीं हुआ।
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