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शायरी महफ़िल · by Isha Menon · 2026-10-29

गाँव की भाषा में लिखी कविता, भोजपुरी में

हिंदी में तो सब लिखते हैं, आज अपनी बोली में लिखने की कोशिश की:

बाबूजी के खेत में अबकी गेहूँ खूब फरल
बाकिर ओह खेत में बाबूजी के पसीना हमसे ना धरल

अर्थ: इस बार बाबूजी के खेत में गेहूँ खूब उगा, पर उस खेत में बाबूजी जितना पसीना बहाते थे, वो मुझसे नहीं हुआ।

31 sparks · 3 comments

Comments

Rohan Mehta · 2 likes

अपनी बोली में लिखी बात सीधे दिल में उतरती है। और लिखिए भोजपुरी में

Paper Baker · 2 likes

बाबूजी वाली बात में बहुत कुछ छुपा है, शहर में आके खेत छोड़ने वाला हर बेटा समझेगा

Priya Nair · 4 likes

हाँ, मैं भी ऐसा ही एक बेटा हूँ