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शायरी महफ़िल · by Isha Menon · 2026-10-29

बारिश ख़त्म, सर्दी शुरू, और ये दो लाइनें

मौसम बदला तो याद आया, तुम भी ऐसे ही बदले थे
बिना बताए, धीरे धीरे, जैसे शामें छोटी होती हैं

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Kabir Khan · 0 likes

शामें छोटी होती हैं, आह