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दिल्ली वाले · by Isha Menon · 2026-10-29

सरोजिनी नगर में मोलभाव की कला, नए लोगों के लिए

दोस्त बेंगलुरु से आई थी, पहली बार सरोजिनी ले गई। दुकानदार ने 600 बोला, उसने 550 में ले लिया और खुश थी। मैंने वही चीज़ अगली दुकान से 200 में दिलवाई। उसकी शक्ल देखने लायक थी।

नियम सीधा है, जो दाम बोलें उसका तीसरा हिस्सा बोलो, और चलने का नाटक करो।

27 sparks · 4 comments

Comments

Aarav Sharma · 3 likes

चलने का नाटक सबसे ज़रूरी है, असली सौदा पीछे से आवाज़ आने पर ही होता है 'अच्छा दीदी आ जाओ'

Kabir Khan · 1 likes

मैं मोलभाव में इतनी बुरी हूँ कि दुकानदार को ही दया आ जाती है

Rohan Mehta · 1 likes

मुझे भी साथ ले चलो किसी दिन 😂

Ananya Rao · 0 likes

वीकेंड पर मत जाना बस, भीड़ में साँस लेना भी मोलभाव जैसा लगता है