शायरी महफ़िल · by Ananya Rao · 2026-11-04
सर्दी की पहली शाम पर दो लाइनें, दाद चाहिए या इस्लाह, दोनों चलेगी
आज छत पर पहली बार ठंडी हवा महसूस हुई तो ये लिख बैठा:
"धुंध में लिपटी है शहर की हर गली,
जैसे तेरी याद ने ओढ़ ली हो कोई शॉल पुरानी।"
मुझे पता है बहर का पूरा ख़याल नहीं रखा, अभी सीख रहा हूँ। आप लोग सर्दियों पर अपनी या किसी पसंदीदा शायर की लाइनें शेयर कीजिए।
"धुंध में लिपटी है शहर की हर गली,
जैसे तेरी याद ने ओढ़ ली हो कोई शॉल पुरानी।"
मुझे पता है बहर का पूरा ख़याल नहीं रखा, अभी सीख रहा हूँ। आप लोग सर्दियों पर अपनी या किसी पसंदीदा शायर की लाइनें शेयर कीजिए।
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